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PPF: पहले जानें पैसे जमा और निकालने के पूरे नियम, फिर शुरू करें निवेश

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PPF: पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF देश में सुरक्षित निवेश और टैक्स बचाने का अच्छा तरीका है। लेकिन फिर भी इसमें निवेश शुरू करने से पहले, पैसे जमा करने और निकालने के अलावा अन्य सभी जरूरी नियमों को जान लेना जरूरी है। आइये इस बारे में जानें

पहले जानें पैसे जमा करने के नियम

पीपीएफ में निवेश बहुत ही कम पैसे से की जा सकती है।

न्यूनतम और अधिकतम निवेश सीमा: एक वित्तीय वर्ष में आपको कम से कम 500 रुपये जमा करना अनिवार्य है। अधिकतम की सीमा 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष तक है। यानी इससे ज्यादा पैसा एक साल में जमा नहीं कराया जा सकता है।

जमा करने का तरीका: पैसा एकमुश्त साल के दौरान किस्तों में जमा किया जा सकता है। एक साल में कितनी भी बार पैसा जमा किया जा सकता है।

खाता निष्क्रिय होना: यदि किसी साल 500 रुपये जमा नहीं कर पाते हैं, तो खाता इनएक्टिव हो जाता है। इसे दोबारा चालू करने के लिए हर साल के हिसाब से 500 रुपये का एरियर और 50 रुपये प्रति वर्ष की पेनल्टी देनी होती है।

अधिक जमा पर नियम: यदि कोई गलती से साल में 1.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा कर देते हैं, तो अतिरिक्त राशि पर न तो कोई ब्याज मिलता है और न ही उस पर धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।

कैसे उठाए ज्यादा फायदा: पीपीएफ पर मौजूदा ब्याज दर 7.1% सालाना है। ब्याज की गणना महीने की 5 तारीख से लेकर आखिरी तारीख के बीच के न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है। इसलिए, अधिकतम फायदा पाने के लिए हर महीने की 5 तारीख से पहले या साल की शुरुआत में 5 अप्रैल से पहले पैसा जमा कर देना चाहिए।

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पैसे निकालने और मैच्योरिटी के नियम

पीपीएफ का मूल लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है। लेकिन आपातकालीन स्थितियों के लिए इसमें बीच में भी पैसे निकालने की व्यवस्था है।

पूर्ण निकासी: 15 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद पूरा पैसा (मूलधन + ब्याज) निकाल सकते हैं। यह पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है।

आंशिक निकासी: अगर किसी को 15 साल से पहले पैसों की जरूरत पड़ती है, तो वह 7वें वित्तीय वर्ष से (यानी 6 साल पूरे होने के बाद) हर साल एक बार आंशिक निकासी कर सकते हैं।

कितना पैसा निकाल सकते हैं? नीचे दी गई दो राशियों में से जो भी कम हो, उसका अधिकतम 50% निकाल सकते हैं:

  • चौथे वित्तीय वर्ष के अंत में जो बैलेंस था।
  • पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में जो बैलेंस था।

समय से पहले खाता बंद करना

खाता खोलने के 5 साल पूरे होने के बाद, आप कुछ विशेष परिस्थितियों में ही खाते को पूरी तरह बंद कर सकते हैं:

  • खाताधारक, जीवनसाथी, या निर्भर बच्चों की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए।
  • खाताधारक या निर्भर बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए।
  • खाताधारक के अनिवासी भारतीय (NRI) बनने पर।

नोट: प्री-मैच्योर क्लोजर करने पर कुल ब्याज दर में 1% की कटौती की जाती है।

पीपीएफ खाते में लोन की सुविधा

अगर खाते के शुरुआती सालों में पैसों की जरूरत है, तो लोन लिया जा सकता है:

कब मिलेगा: खाता खोलने के तीसरे वित्तीय वर्ष से छठे वित्तीय वर्ष के अंत तक लोन की सुविधा मिलती है।

कितना मिलेगा: आप जिस साल लोन अप्लाई कर रहे हैं, उससे ठीक 2 साल पहले के अंत में मौजूद बैलेंस का अधिकतम 25% लोन के रूप में ले सकते हैं।

मैच्योरिटी (15 साल) के बाद के विकल्प

जब आपका खाता 15 साल पूरे कर लेता है, तो आपके पास 3 विकल्प होते हैं:

पूरा पैसा निकालना: खाता बंद करें और पूरा फंड अपने सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर कर लें।

बिना नया निवेश किए बढ़ाना: आप अगले 5 साल के लिए खाते को बढ़ा सकते हैं। इसमें आपको नया पैसा जमा नहीं करना होगा, लेकिन मौजूदा बैलेंस पर ब्याज मिलता रहेगा। इस दौरान आप साल में एक बार कितनी भी राशि निकाल सकते हैं।

नया निवेश जारी रखते हुए बढ़ाना: आप 5-5 साल के ब्लॉक में खाते को आगे बढ़ा सकते हैं और निवेश भी जारी रख सकते हैं। इसके लिए मैच्योरिटी के 1 साल के भीतर Form H भरकर देना होता है। इस विकल्प में शुरुआत के बैलेंस का अधिकतम 60% हिस्सा निकाल सकते हैं।

टैक्स बेनिफिट्स

PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) का दर्जा प्राप्त है:

  • पहला Exempt: जमा की गई राशि पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत छूट मिलती है, लेकिन यह छूट ओल्ड टैक्स व्यवस्था में ही मिलती है।
  • दूसरा Exempt: इस पर मिलने वाला सालाना ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।
  • तीसरा Exempt: मैच्योरिटी के समय मिलने वाली पूरी रकम पर कोई टैक्स नहीं लगता।

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