RBI Repo Rate History: मोदी राज 2014 में शुरू हुआ था, जो अभी तक जारी है। ऐसे में क्या एक पार्टी की सरकार के रहने से रेपो रेट में कमी आती है, अगर आपके मन में सवाल हो तो यहां पर इसका उत्तर खोज सकते हैं। मोदी सरकार का कार्यकाल जब शुरू हुआ था, उस वक्त रेपो रेट करीब 8 फीसदी के आसपास थी। आइये जानें कि अब यह कितना है। इसके अलावा 2014 से अभी तक रेपो रेट का सफर भी जानते हैं।
रेपो रेट क्या है?
जब हमें पैसे की जरूरत होती है, तो हम बैंक के पास जाते हैं। बैंक कुछ ब्याज लेकर हमें लोन देते हैं। इसे लोन देने की लागत कहा जाता है। इसी तरह, जब बैंकों को पैसे की जरूरत होती है, तो वे आरबीआई के पास जाते हैं। जिस दर पर वे आरबीआई से पैसे उधार लेते हैं, उसे रेपो रेट कहा जाता है। रेपो रेट ज्यादा होने का मतलब है कि बैंकों की शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए लोन लेने की लागत ज्यादा होगी।
रिवर्स रेपो रेट क्या है?
अगर किसी के पास पैसे होते हैं, तो वह उन्हें बैंक में जमा करते हैं। बदले में, बैंक कुछ ब्याज देता है? ठीक उसी तरह, जब बैंकों के पास अतिरिक्त पैसा होता है, तो वे उस एक्स्ट्रा पैसे को आरबीआई के पास जमा करते हैं। इस पर उन्हें जो ब्याज मिलता है, उसकी दर को रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है। इस जमा राशि के लिए, आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में कोलेटरल (गिरवी रखने के लिए संपत्ति) देता है।
आरबीआई रेपो और रिवर्स रेपो रेट क्यों बदलता है?
जब भी आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों को पैसे उधार लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ता है। बदले में, बैंक अपने ग्राहकों से ज्यादा ब्याज दर वसूलते हैं। हमारे लिए उधार लेने की लागत बढ़ जाती है, इसलिए लोग लोन लेने से हिचकिचाते हैं। इस वजह से, लोग कम खर्च करते हैं। क्योंकि सामान और सेवाओं की मांग कम होती है, इसलिए उनकी कीमतें गिर जाती हैं। इससे महंगाई दर कम हो जाती है। आसान शब्दों में, महंगाई को कंट्रोल करने के लिए आरबीआई रेपो और रिवर्स रेपो रेट को बदलता है।
और अगर महंगाई कम है, तो इसका मतलब है कि सामान और सेवाओं की मांग कम है। खर्च को बढ़ावा देने और मांग बढ़ाने के लिए, आरबीआई रेपो और रिवर्स रेपो रेट कम कर देगा। जैसे ही बैंकों के लिए ब्याज दरें कम होती हैं, बैंक हमें कम दर पर लोन देने लगते हैं। इससे लोग पैसे उधार लेना और खर्च करना शुरू कर देते हैं। इसलिए, जब भी महंगाई को कम या ज्यादा करने की जरूरत होती है, आरबीआई रेपो या रिवर्स रेपो रेट बदलता है।
यह भी पढ़ें: Reliance Group: जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के पहले जानें कितनी कंपनियां हैं लिस्ट – FULL List
वर्ष 2026 में अभी तक रेपो रेट की हिस्ट्री
- 8 अप्रैल 2026 को 5.25% फीसदी
- 06 फरवरी 2026 को 5.25% फीसदी
वर्ष 2025 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 05 दिसंबर 2025 को 5.25% फीसदी
- 01 अक्टूबर 2025 को 5.5% फीसदी
- 06 जून 2025 को 5.5% फीसदी
- 09 अप्रैल 2025 को 6% फीसदी
- 07 फरवरी 2025 को 6.25% फीसदी
वर्ष 2024 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 06 दिसंबर 2024 को 6.50% फीसदी
- 08 अक्टूबर 2024 को 6.50% फीसदी
- 08 अगस्त 2024 को 6.50% फीसदी
- 07 जून 2024 को 6.50% फीसदी
- 06 अप्रैल 2024 को 6.50% फीसदी
- 8 फरवरी 24 को 6.50 फीसदी
वर्ष 2023 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 8 दिसंबर 23 को 6.50 फीसदी
- 6 अक्टूबर 23 को 6.50 फीसदी
- 10 अगस्त 23 को 6.50 फीसदी
- 8 जून 23 को 6.50 फीसदी
- 4 अप्रैल 23 को 6.50 फीसदी
- 8 फरवरी 23 को 6.50 फीसदी
वर्ष 2022 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 7 दिसंबर 22 को 6.25 फीसदी
- 30 सितंबर 22 को 5.90 फीसदी
- 5 अगस्त 22 को 5.40 फीसदी
- 8 जून 22 को 4.90 फीसदी
- 4 मई 22 को 4.40 फीसदी
- 10 फरवरी 22 को 4 फीसदी
वर्ष 2021 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 8 दिसंबर 21 को 4 फीसदी
- 8 अक्टूबर 21 को 4 फीसदी
- 6 अगस्त 21 को 4 फीसदी
- 4 जून 21 को 4 फीसदी
- 7 अप्रैल 21 को 4 फीसदी
- 5 फरवरी 21 को 4.00 फीसदी
वर्ष 2020 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 4 दिसंबर 20 को 4.00 फीसदी
- 9 अक्टूबर 20 को 4.00 फीसदी
- 6 अगस्त 20 को 4.00 फीसदी
- 22 मई 2020 को 4.00 फीसदी
- 27 मार्च 2020 को 4.40 फीसदी
वर्ष 2019 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 4 अक्टूबर 2019 को 5.15 फीसदी
- 7 अगस्त 2019 को 5.40 फीसदी
- 6 जून 19 को 5.75 फीसदी
- 04 अप्रैल 19 को 6.00 फीसदी
- 07 फरवरी 19 को 6.25 फीसदी
वर्ष 2018 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 05 दिसंबर 18 को 6.50 फीसदी
- 05 अक्टूबर 18 को 6.50 फीसदी
- 01 अगस्त 18 को 6.50 फीसदी
- 06 जून 18 को 6.25 फीसदी
- 05 अप्रैल 18 को 6.00 फीसदी
- 07 फरवरी 18 को 6.00 फीसदी
वर्ष 2017 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 06 दिसंबर 17 को 6.00 फीसदी
- 04 अक्टूबर 17 को 6.00 फीसदी
- 02 अगस्त 17 को 6.00 फीसदी
- 08 जून 17 को 6.25 फीसदी
- 06 अप्रैल 17 को 6.25 फीसदी
- 08 फरवरी 17 को 6.25 फीसदी
वर्ष 2016 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 07 दिसंबर 16 को 6.25 फीसदी
- 04 अक्टूबर 16 को 6.25 फीसदी
- 05 अप्रैल 16 को 6.50 फीसदी
वर्ष 2015 में रेपो रेट की हिस्ट्री
- 29 सितंबर 15 को 6.75 फीसदी
- 02 जनवरी 15 को 7.25 फीसदी
- 04 मार्च 15 को 7.50 फीसदी
- 15 जनवरी 15 को 7.75 फीसदी
यह भी पढ़ें: Mutual Fund Vs MIS: जानें MIS और इन्वेस्को इंडिया बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में कहां मिला ज्यादा फायदा
Disclaimer: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। upari kamai अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने सेबी रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।







One Comment
Good one