8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसके संभावित लागू होने को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। ऐसे में निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वेतन आयोग के लागू होने से शेयर बाजार को कोई नई दिशा मिलती है? कौन कौन से सेक्टर में इसका असर दिख सकता है?
वास्तव में, वेतन आयोग लागू होने का असर सीधे तौर पर शेयर बाजार पर नहीं पड़ता, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों, लिक्विडिटी (नकदी) और उपभोग (Consumption) के माध्यम से बाजार को प्रभावित करता है। इतिहास गवाह है कि जब भी सरकारी कर्मचारियों के वेतन और एरियर में बढ़ोतरी होती है, तो ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे उपभोग-आधारित सेक्टरों को इसका सीधा लाभ मिलता है।
हालांकि, बाजार की दिशा केवल वेतन आयोग से तय नहीं होती। उस समय की वैश्विक परिस्थितियां, ब्याज दरें, महंगाई, कॉरपोरेट नतीजे और निवेशकों की धारणा भी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आइए, पिछले तीन वेतन आयोगों (5वें, 6वें और 7वें) के लागू होने के बाद के 1 साल के ऐतिहासिक डेटा पर नज़र डालते हैं ताकि यह समझा जा सके कि विभिन्न समयावधियों में बाजार की चाल कैसी रही। सेंसेक्स के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर यह विश्लेषण तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य वेतन आयोग और बाजार के बीच प्रत्यक्ष कारण-परिणाम (Cause & Effect) संबंध स्थापित करना नहीं है।
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8th Pay Commission: 5वां वेतन आयोग लागू होने की डेट 30 सितंबर 1997
- Sensex वेतन लागू होने वाले दिन 3,904.53 अंक के स्तर पर था।
- वहीं माह बाद सेंसेक्स 3,745.28 अंक के स्तर पर था, यानी करीब 4.08% की गिरावट।
- वहीं 3 महीने बाद सेंसेक्स करीब 3,658.98 अंक के स्तर पर था, यानी करीब 6.29%की गिरावट।
- वहीं सेंसेक्स 6 माह बाद कीरब 3,892.74 अं के स्तर पर था, यानी करीब 0.30% की गिरावट।
- वहीं सेंसेक्स 12 महीना के बाद करीब 3,101.84 अंक के स्तर पर था, यानी करब 20.56% की गिरावट।
नोट: 5वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद का साल (1998) भारतीय बाजारों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इस दौरान मई 1998 में परमाणु परीक्षण (पोखरण-II) के बाद लगे आर्थिक प्रतिबंधों और एशियाई वित्तीय संकट (Asian Financial Crisis) के कारण 12 महीने बाद बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई थी।
8th Pay Commission: 6ठा वेतन आयोग लागू होने की डेट 29 अगस्त 2008
- Sensex वेतन आयोग लागू होने वाले दिन 14,564.53 के स्तर पर था।
- वहीं सेंसेक्स 1 महीने के बाद करीब 13,102.04 अंक यानी 10.04%की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
- वहीं सेंसेक्स 3 महीना बाद करीब 9,092.72 अंक के स्तर पर था, यानी करीब 37.57% की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
- इसके अलावा सेंसेक्स 6 महीने के बाद करीब 8,891.61 अंक के स्तर पर था, यानी करीग 38.95% की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
- वहीं सेंसेक्स 12 महीना बाद करीब 15,922.33 अंक के स्तर पर था, यानी करीब 9.32% की तेजी के साथ बंद हुआ था।
नोट: यह अवधि इतिहास के सबसे बड़े वैश्विक वित्तीय संकट 2008 Global Financial Crisis – Lehman Brothers की घटना हुई थी। इसका असर लम्बे समय तक भारत और दुनिया के शेयर बाजारों में रहा।
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8th Pay Commission: 7वां वेतन आयोग लागू होने की डेट 25 जुलाई 2016
- वेतन आयोग लागू होने वाले दिन सेंसेक्स 27,836.58 अंक के स्तर पर बंद हुआ था।
- वही यह सेंसेक्स 1 महीने बाद करीब 27,782.25 अंक के स्तर पर था, यानी 0.19% की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
- इसके अलावा सेंसेक्स 3 महीने बाद करीब 28,179.08 के स्तर पर बंद हुआ था। इस प्रकार से यह करीब 1.23% की तेजी के साथ बंद हुआ था।
- वहीं सेंसेक्स करीब 6 महीने बाद 27,708.14 अंक के स्तर पर बंद हुआ था। इस प्रकार से यह करीब 0.46% की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
- सेंसेक्स वेतन आयोग लागू होने के 12 महीने बाद करीब 32,245.87 अंक के स्तर पर बंद हुआ था। इस प्रकार से इसमें 15.84% की तेजी दर्ज हुई थी।
नोट: 7वें वेतन आयोग के लागू होने के कुछ महीनों बाद (नवंबर 2016) देश में नोटबंदी (Demonetisation) हुई, जिसके कारण 6 महीने का रिटर्न लगभग सपाट रहा। लेकिन जैसे ही सिस्टम में लिक्विडिटी वापस आई और वेतन वृद्धि व एरियर का पैसा ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में पहुंचा, 12 महीने के अंत तक Nifty और Sensex दोनों ने 15% से ज्यादा का बेहतरीन वास्तविक रिटर्न दिया।
8th Pay Commission: आंकड़ों से क्या मिलता है सबक
इतिहास बताता है कि वेतन आयोग अपने आप में शेयर बाजार के लिए तेजी या गिरावट का कारण नहीं होता। इसका असर मुख्य रूप से बढ़ी हुई आय, उपभोग और आर्थिक गतिविधियों के जरिए दिखाई देता है। यदि उसी समय वैश्विक वित्तीय संकट, युद्ध, महंगाई, ब्याज दरों में बदलाव या बड़े सरकारी फैसले हों, तो उनका प्रभाव कहीं अधिक बड़ा हो सकता है। ऐसे में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने के बाद शेयर बाजार पिछले वेतन आयोगों जैसी चाल दिखा भी सकता है और नहीं भी। बाजार पर वेतन आयोग की तुलना में तत्कालीन वैश्विक संकटों या बड़े व्यापक आर्थिक (Macroeconomic) फैसलों का तात्कालिक असर ज्यादा होता है।
अतः, लिक्विडिटी और कंजम्पशन बूस्ट की उम्मीद में सीधे दांव लगाने के बजाय, निवेशकों को व्यापक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए। बाजार में किसी भी बड़े निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से राय जरूर लें।
8th Pay Commission: किन सेक्टरों को फायदा हो सकता है?
ऑटो
सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार, बाइक और स्कूटर की खरीद बढ़ सकती है।
संभावित लाभार्थी कंपनियां
- Maruti Suzuki
- Mahindra
- Tata Motors
- Hero MotoCorp
- TVS Motor
एफएमसीजी
अतिरिक्त आय का बड़ा हिस्सा दैनिक उपभोग में जाता है।
संभावित लाभार्थी कंपनियां
- Hindustan Unilever
- ITC
- Britannia
- Nestlé India
- Dabur
कंज्यूमर ड्यूरेबल
एसी, फ्रिज, टीवी और वॉशिंग मशीन जैसी चीजों की मांग बढ़ सकती है।
बैंकिंग
होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की मांग बढ़ सकती है।
रियल एस्टेट
आय बढ़ने से घर खरीदने की क्षमता बढ़ सकती है।
नोट: ऐसे में इन सेक्टार की अच्छी कंपनियों पर नजर रखी जा सकती है। हालांकि निवेश का कोई भी फैसला वित्तीय सलाहकार की राय से ही लेना उचित होता है।
Disclaimer: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। upari kamai अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।






