NRI Tax Rule: विदेश में काम करने वाले भारतीयों (NRI) के लिए टैक्स से जुड़ी एक बड़ी राहत की खबर है। यदि आपने विदेश से भेजी गई कन्वर्टिबल फॉरेन एक्सचेंज के जरिए भारतीय शेयरों में निवेश किया है, तो कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर उन्हें बेचने से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर भारत में टैक्स नहीं देना पड़ेगा। हालांकि, यह छूट हर एनआरआई को नहीं मिलेगी। आइए जानते हैं आयकर कानून की धारा 115F के तहत किन निवेशकों को इसका लाभ मिल सकता है।
NRI Tax Rule: जानें धारा 115F
दरअसल, आयकर अधिनियम की धारा 115F के तहत यह राहत उन एनआरआई को मिलती है, जिन्होंने भारतीय शेयर कन्वर्टिबल फॉरेन एक्सचेंज यानी विदेश से अधिकृत बैंकिंग चैनल के माध्यम से भेजी गई विदेशी मुद्रा से खरीदे हों। ऐसे शेयर “फॉरेन एक्सचेंज एसेट” की श्रेणी में आते हैं। हालांकि, सिर्फ एनआरआई होना ही इस छूट के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कुछ अहम शर्तों का पालन करना जरूरी है।
NRI Tax Rule: क्या हैं प्रमुख शर्तें?
शेयर एनआरआई रहते हुए विदेश से भेजी गई कन्वर्टिबल फॉरेन एक्सचेंज से खरीदे गए हों।
शेयर बेचने के बाद प्राप्त शुद्ध बिक्री राशि को 6 महीने के भीतर आयकर कानून में निर्धारित परिसंपत्तियों में दोबारा निवेश करना होगा। यदि पूरी बिक्री राशि का पुनर्निवेश किया जाता है, तो पूरे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट मिल सकती है। आंशिक निवेश की स्थिति में छूट भी उसी अनुपात में मिलेगी।
नए निवेश को कम से कम तीन साल तक बनाए रखना होगा। यदि तीन साल से पहले निवेश बेच दिया जाता है, तो पहले मिली टैक्स छूट वापस ले ली जाएगी और संबंधित पूंजीगत लाभ पर टैक्स देना होगा।
NRI Tax Rule: किन परिसंपत्तियों में निवेश करने पर मिलेगी छूट?
आयकर कानून के अनुसार भारतीय कंपनियों के शेयर, डिबेंचर, कुछ सार्वजनिक कंपनियों की जमा योजनाएं, केंद्र सरकार की प्रतिभूतियां (Government Securities) और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य निर्दिष्ट परिसंपत्तियां इस श्रेणी में शामिल हो सकती हैं।
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NRI Tax Rule: किन मामलों में नहीं मिलेगा लाभ?
यदि किसी व्यक्ति ने भारत में अपने घरेलू बैंक खाते या भारतीय कमाई से शेयर खरीदे थे और बाद में एनआरआई बनने के बाद उन्हें बेचा, तो सामान्य तौर पर धारा 115F के तहत यह छूट उपलब्ध नहीं होगी। यह लाभ मुख्य रूप से उन निवेशों पर लागू होता है, जो विदेशी मुद्रा से किए गए हों।
NRI Tax Rule: विदेश में टैक्स का क्या होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में टैक्स छूट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति के निवास वाले देश में भी टैक्स नहीं लगेगा। यह उस देश के टैक्स कानून और भारत के साथ हुए डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) पर निर्भर करेगा।
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ऐसे में विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए शेयर बेचने से पहले निवेश की प्रकृति, धन के स्रोत और संबंधित टैक्स नियमों की जांच करना जरूरी है, ताकि उपलब्ध टैक्स छूट का सही लाभ उठाया जा सके।






