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NSE IPO: एनएसई नहीं बीएसई पर होगा लिस्ट, जानें इससे BSE Share के फायदे और नुकसान

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NSE IPO: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने आईपीओ के लिए सेबी के पास दस्तावेज जमा कर दिए हैं। कुछ ही दिनों में यह एनएसई का आपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हो जाएगा। लेकिन क्या आपको पता है कि एनएसई का आईपीओ खुद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट नहीं हो सकता है। यह आईपीओ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में लिस्ट होगा। सेबी के नियमों (Cross-Listing Rule) के मुताबिक, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता। हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ही लिस्ट होना पड़ेगा, ठीक वैसे ही जैसे BSE खुद NSE पर लिस्टेड है।

जानें बीएसई के शेयर के फायदे और नुकसान

लिस्टिंग और ट्रांजैक्शन फीस से बड़ी कमाई: NSE IPO देश में अभी तक के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि इसकी वैल्युएशन लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है।

सालाना लिस्टिंग फीस: लिस्ट होने के बाद NSE को हर साल BSE को एक निश्चित लिस्टिंग फीस देनी होगी।

ट्रांजैक्शन और ट्रेडिंग वॉल्यूम: NSE के शेयरों में होने वाली भारी-भरकम ट्रेडिंग वॉल्यूम का पूरा ट्रांजैक्शन चार्ज सीधे BSE की जेब में जाएगा, जिससे उसके रेवेन्यू (Revenue) में सीधा उछाल आएगा।

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वैल्युएशन री-रेटिंग

शेयर बाजार हमेशा पीयर कंपैरिजन यानी एक जैसे बिजनेस वाली कंपनियों की तुलना करके वैल्युएशन तय करता है। अभी तक लिस्टेड स्पेस में BSE इकलौता बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, हालांकि MCX भी है, लेकिन उसमें केवल कमोडिटी का ही कारोबार होता है। जब बाजार की दिग्गज कंपनी NSE लिस्ट होगी और उसे अच्छा वैल्युएशन मल्टीपल मिलेगा, तो उसका सीधा फायदा बेंचमार्क के रूप में BSE के शेयर को भी मिलेगा। इससे BSE के शेयर की री-रेटिंग (Re-rating) हो सकती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

नए इन्वेस्टर अकाउंट्स और फुटफॉल बढ़ेगा

NSE आईपीओ के प्रति रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों में भारी क्रेज है। चूंकि इसकी ट्रेडिंग सिर्फ BSE पर होगी, इसलिए बहुत से ऐसे निवेशक या विदेशी फंड जो अब तक केवल NSE के सेगमेंट में ज्यादा एक्टिव थे, उन्हें BSE प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रेडिंग करनी होगी। इससे BSE के ओवरऑल इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

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कहां रखनी होगी सतर्क नजर

हालांकि ये सभी फायदे BSE के बिजनेस को मजबूत करेंगे, लेकिन शॉर्ट-टर्म मार्केट सेंटिमेंट में एक बात और ध्यान देने वाली होगी। कई बार बड़े फंड हाउस जो केवल ‘एक्सचेंज बिजनेस’ में पैसा लगाना चाहते थे और जिनके पास पहले सिर्फ BSE का विकल्प था, वे अपना कुछ एलोकेशन निकालकर NSE के आईपीओ में शिफ्ट कर सकते हैं। इसे “फ्लो डायवर्जन” कहते हैं।

Disclaimer: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। upari kamai अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने सेबी रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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